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Hon'ble CM of Gujarat at state level Bankers Committe meet

गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश की राष्ट्रीयकृत बैंकों से सर्वसमावेशक विकास के लिए बैंकिंग सेक्टर का प्लान-मॉडल अपनाने की हिमायत की है। गुजरात की स्टेट लेबल बैंकर्स कमेटी की बैठक में उन्होंने कहा कि बैंकिंग बिजनेस और बैंकिंग सेवाओं में सर्वसमावेशक विकास के रोड मैप के लिए नये आयामों और पहल की अपेक्षा की पूर्ति के लिए बैंक प्रो-एक्टिव बने यह समय की मांग है।

गांधीनगर के महात्मा मंदिर में १३८वीं गुजरात स्टेट लेबल बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की बैठक आज आयोजित हुई थी। बैठक में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीयकृत बैंकों को देश के आर्थिक विकास में योगदान देने की भूमिका के साथ आम आदमी, गरीब, किसान, युवा, महिला एवं नवोदित मध्यम वर्ग को मानवीय अभिगम के साथ बैंकिंग सेवाओं को सरलतम स्तर पर उपलब्ध कराने का प्रेरक सुझाव दिया।

श्री मोदी ने कहा कि गुजरात की राष्ट्रीयकृत बैंकें, बैंकिंग सेवाओं और सर्वसमावेशक विकास (इन्क्लूसिव ग्रोथ) को मिशन मोड पर ले जाने में समग्र देश के लिए पथप्रदर्शक बन सकती है। गुजरात सरकार ने सर्वसमावेशक सर्वदेशीक विकास की जिन सार्वत्रिक उपलब्धियों का माहौल खड़ा किया है, उसमें बैंकों के उत्तम योगदान प्रदान करने की अनेक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि बैंक गुजरात में अपनी सेवाओं के दायरे में विस्तार के साथ गुणात्मक बदलाव ला सकती हैं।

गुजरात में राष्ट्रीयकृत बैंकों का क्रेडिट-डिपॉजिट रेश्यो (सीडीआर) अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम होने और बैंकों द्वारा बतायी जाने वाली इसकी वजहों को अस्वीकार्य बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्य राज्यों का सीडीआर सौ फीसदी से ज्यादा है जबकि गुजरात में ७५ फीसदी सीडीआर है।

बैंकों द्वारा इस सन्दर्भ में यह बात कही जाती है कि मुंबई में पंजीकृत हुए उद्योगों एवं कंपनियों के बचत-कर्ज की इसमें गणना नहीं की जाती। यदि इस तर्क को स्वीकार करें तो यह बात और भी गंभीर सवाल खड़े करती है, क्या गुजरात की बैंकें शेष २५ फीसदी क्रेडिट-डिपॉजिट रेश्यो के लिए मुंबई की कुछ गिनी-चुनी कंपनियों के लिए सेवारत बनी हुई है।

इस सन्दर्भ में मुख्यमंत्री ने गुजरात में बैंकों के क्रेडिट-डिपॉजिट रेश्यो की परिभाषा और मानसिकता बदलने की अपील की। उन्होंने ऐसा विश्वसनीय वातावरण स्थापित करने को कहा जिसमें उद्योग-कॉरपोरेट सेक्टर को जितनी तेज गति और सरलता से बैंकिंग सेवाओं का लाभ मिलता है, उतनी ही तत्परता और मानवीय अभिगम के साथ आम आदमी और लक्षित लाभार्थियों को भी बैंकिंग सेवाओं का लाभ मिले।

उन्होंने प्रेरक अनुरोध करते हुए कहा कि राष्ट्रीयकृत बैंकें अपनी बैंकिंग सेवा के कानून-नियमों की परिसीमा के परंपरागत दायरे से बाहर निकलकर नवोदित मध्यम वर्ग, गरीब और जरूरतमंद व्यक्तियों, युवाओं, कर्जदार किसान, श्रमयोगी समाज-कारीगर और ग्रामीण महिला सखी मंडलों जैसे लक्षित लाभार्थियों को बैंकों के रुपये-पैसों से नहीं बल्कि मानवता के अभिगम से मददगार होने की विश्वसनीयता खड़ी करे।

मुख्यमंत्री ने गुजरात सरकार की अफोर्डेबल हाउसिंग योजनाओं में बैंकिंग सेक्टर से अपना निर्णायक योगदान देने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि देश में नवोदित मध्यम वर्ग समुदाय का उदय हो गया है। विकास की उनकी आशा-आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए बैंकिंग क्षेत्र के प्रेरक रूप से मददगार साबित होने की विशाल संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नवोदित मध्यम वर्ग गरीब बस्ती में से बाहर आया है, उसे नई दिशा में अपनी प्रगति के सपने को साकार करना है। अपने परिवार में बुजुर्गों के स्वास्थ्य, संतानों को अच्छी शिक्षा के साथ ही इस वर्ग की चाहत खुद की मालिकी के एक अदद घर की है। बैंकें सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की भावना के साथ इस नवोदित मध्यम वर्ग की मदद करने का प्रेरक नेतृत्व करे।

श्री मोदी ने कहा कि भारत जैसे दुनिया के सबसे युवा देश में एक ओर करोड़ों युवा रोजगार के अवसर की तलाश में हैं तो दूसरी ओर विश्व भर में ओबामा से लेकर डॉ. अब्दुल कलाम तक सभी महानुभाव स्किल डेवलपमेंट के लिए हुनर-कौशलयुक्त मानव शक्ति की विशाल संपदा उपलब्ध करने की अग्रिमता पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने बैंकों से युवाओं की शैक्षणिक जरुरतों की पूर्ति के लिए शैक्षणिक कर्ज लेने वाले युवाओं को सरल प्रक्रिया से मददगार होने का अभिगम अपनाने को कहा।

कृषि क्षेत्र में ऋण एवं किसानों को समय पर मदद देने के लिए बैंकों को अपनी परंपरागत मानसिकता से बाहर निकलने का प्रेरक सुझाव देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे देश में कर्ज में डुबे किसानों की आत्महत्या एक गंभीर समस्या का रूप अख्तियार कर चुकी है। कर्ज में डुबकर खुदकुशी करने वाले बदनसीब किसानों को साहूकार के ब्याज के चंगुल में से बचाने के लिए बैंकों ने मिशन मोड पर कोई विचार ही नहीं किया है।

कृषि से संबंधित ढांचागत सुविधाओं के विकास के लिए बैंकों को अग्रिमता के स्तर पर कार्ययोजना तैयार करने की हिमायत करते हुए श्री मोदी ने कहा कि भारत में खेत उत्पादों के लिए संग्रह-भंडारण के लिए वेयरहाउसिंग, माल गोडाउन और कोल्ड स्टोरेज चेन के ढांचागत विकास का भी बैंकिंग सेवा के प्रायोरिटी सेक्टर में क्यों न समावेश किया जाए। इससे कुल मिलाकर भारत की अर्थव्यवस्था को ही ताकत मिलेगी।

आधुनिक खेती में खेत उत्पादों के मूल्यवर्धित बाजारों और निर्यात की विशाल संभावनाओं को ध्यान में लेते हुए मुख्यमंत्री ने खाद्य प्रसंस्करण इंडस्ट्रीज और वैल्यू एडेड ऑर्गेनिक फार्मिंग को बैंकिंग सेवाओं में प्रधानता देने का सुझाव दिया। प्रायोरिटी बैंकिंग सेवाओं में टुरिज्म-इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का समावेश करने की जरूरत पर श्री मोदी ने जोर दिया। उन्होंने कहा कि बैंक सामाजिक दायित्व की भूमिका निभाने के लिए पर्यटन क्षेत्र में ढांचागत सुविधा खड़ी कर देश के पर्यटन क्षेत्र में अपना योगदान दे सकती है। इतना ही नहीं, कम पूंजीनिवेश से सबसे ज्यादा रोजगार उपलब्ध कराने वाले पर्यटन क्षेत्र का भी बैंकिंग सेवा की अग्रिमता में समावेश करना चाहिए।

गुजरात में बैंकिंग सेवाओं में गुणात्मक बदलाव के लिए उपलब्ध टेक्नोलॉजी नेटवर्क के व्यापक ढांचे की रूपरेखा पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार की योजना के तहत ऑनलाइन फाइनेंसियल ट्रांजेक्शन का सबसे ज्यादा ३० फीसदी हिस्सा गुजरात का है और गुजरात के १८ हजार गांवों में ब्रॉड बैंड कनेक्टिविटी की सुविधा उपलब्ध है, बैंकों को इसका अधिकतम लाभ लेना चाहिए।

वित्त मंत्री नितिनभाई पटेल ने गुजरात के सर्वांगीण विकास में मुख्यमंत्री श्री मोदी के शासनकाल में जो नये क्षेत्र तेज गति से प्रगति कर रहे हैं उसमें बैंकों से सार्थक भूमिका निभाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की अनेक गरीबलक्षी योजनाओं में गारंटी दी जा रही है। ऐसे में, बैंकों का दायित्व व्यापक स्तर पर खड़ा होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि गुजरात में सहकारी बैंकिंग क्षेत्र की विश्वसनीयता और लोकस्वीकृत सेवाओं के सन्दर्भ में राष्ट्रीयकृत बैंकों की सेवाएं ज्यादा मानवीय अभिगम के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा करे।

एसएलबीसी के अध्यक्ष और गुजरात की लीड बैंक देना बैंक के चेयरमैन सह मैनेजिंग डायरेक्टर अश्विन कुमार ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि गुजरात के विकास में मुख्यमंत्री के सफल और प्रेरक नेतृत्व से हासिल हुई उपलब्धियों को आगे बढ़ाने में राष्ट्रीयकृत बैंक अपनी भूमिका निभाने को प्रतिबद्ध हैं।

बैठक में रिजर्व बैंक के प्रादेशिक निदेशक सुदर्शन सेन, नाबार्ड के चीफ जनरल मैनेजर एम.के. मुद्गल, भारत सरकार के वित्त विभाग की संयुक्त सचिव श्रीमती श्रेया गूण सहित गुजरात भर की बैंकों के पदाधिकारी, जिला विकास अधिकारी सहित बैंकिंग क्षेत्र के अग्रणी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीयकृत बैंकों से भारत को शक्तिशाली बनाने के सपने में सहभागी बनने का प्रेरक आह्वान करते हुए कहा कि भारत जब अपनी स्वाधीनता की शताब्दी मनाए तब भारत का सामर्थ्य और शक्ति का दर्शन दुनिया को कराने के लिए अभी से भारत विजन-२०४७ पर विचार करना चाहिए और बैंकों को शक्तिशाली भारत के निर्माण में अपना योगदान सुनिश्चित करना चाहिए।

 
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